Panchatantra Story Unity Is Strength Essays

Here is a short story on Unity is Strength

One day a hunter went out to catch birds. He spread out a net on the ground. He put rice all over the net. Then he hid in a bush nearby.

Soon some pigeons came flying by. They saw the rice. They did not see the net.

They flew to the ground. They began to eat the rice.

The hunter in the bush saw the pigeons eating the rice. He pulled the string of the net. The pigeons were caught in the net.

The pigeons had a leader. He said to the pigeons, ‘We are ‘caught in a hunter’s net. Don’t get afraid. Do what I say. Then you will be saved.’

‘We will do what you say,’ said all the pigeons.

‘Fly together up in the sky,’ said the leader. All the pigeons flew up. They took the net off the ground.

The hunter ran after them. But he could not catch them.

The leader said, ‘We have got away from the hunter. But we have not got away from the net. Let us go to our friend, the mouse. He will help us.’

They flew down to the ground. They found the mouse in his hole.

The leader said, ‘Friend mouse, will you help us?’

‘Most gladly! said the mouse. With his sharp teeth he cut through the net. He set all the pigeons free.

Moral: Unit is Strength. Obey your Leader and you will be Strong.

Category: KidsTagged With: Stories on Unity is Strength

एक बार हाथ की पाँचों उंगलियों में आपस में झगड़ा हो गया| वे पाँचों खुद को एक दूसरे से बड़ा सिद्ध करने की कोशिश में लगे थे |

अंगूठा बोला की मैं सबसे बड़ा हूँ, उसके पास वाली उंगली बोली मैं सबसे बड़ी हूँ इसी तरह सारे खुद को बड़ा सिद्ध करने में लगे थे जब निर्णय नहीं हो पाया तो वे सब अदालत में गये |

न्यायाधीश ने सारा माजरा सुना और उन पाँचों से बोला की आप लोग सिद्ध करो की कैसे तुम सबसे बड़े हो? अंगूठा बोला मैं सबसे ज़्यादा पढ़ा लिखा हूँ क्यूंकी लोग मुझे हस्ताक्षर के स्थान पर प्रयोग करते हैं|

पास वाली उंगली बोली की लोग मुझे किसी इंसान की पहचान के तौर पर इस्तेमाल करते हैं| उसके पास वाली उंगली ने कहा की आप लोगों ने मुझे नापा नहीं अन्यथा मैं ही सबसे बड़ी हूँ |

उसके पास वाली उंगली बोली मैं सबसे ज़्यादा अमीर हूँ क्यूंकी लोग हीरे और जवाहरात और अंगूठी मुझी में पहनते हैं| इसी तरह सभी ने अपनी अलग अलग प्रशन्शा की |

न्यायाधीश ने अब एक रसगुल्ला माँगाया और अंगूठे से कहा की इसे उठाओ, उंगुठे ने भरपूर ज़ोर लगाया लेकिन रसगुल्ले को नहीं उठा सका | इसके बाद सारी उंगलियों ने एक एक करके कोशिश की लेकिन सभी विफल रहे|

अंत में न्यायाधीश ने सबको मिलकर रसगुल्ला उठाने का आदेश दिया तो झट से सबने मिलकर रसगुल्ला उठा दिया |

फ़ैसला हो चुका था, न्यायाधीश ने फ़ैसला सुनाया कि तुम सभी एक दूसरे के बिना अधूरे हो और अकेले रहकर तुम्हारी शक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है, जबकि संगठित रहकर तुम कठिन से कठिन कम आसानी से कर सकते हो|

तो मित्रों, संगठन में बहुत शक्ति होती है यही इस कहानी की शिक्षा है, एक अकेला चना कभी भाड़ नहीं फोड़ सकता

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